मुंबई। Hum Honge Kaamyab Song: इन दिनों स्टैंड अप कॉमडेयिन कुणाल कामरा का ‘नया भारत’ वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ। कुणाल ने इस वीडियो में सत्ता, नेता और सियासी फैसलों पर चुटीले अंदाज में टिप्पणियां की हैं। इसके लिए उन्होंने पैरोडी सॉन्ग्स का भी इस्तेमाल किया है।
वीडियो में कुछ छह पैरोडी सॉन्ग्स हैं, जिनें से एक पैरोडी गाना ‘हम होंगे कंगाल एक दिन’ लोकप्रित गीत ‘हम होंगे कामयाब एक दिन’ पर आधारित है। कुणाल के वीडियो पर विवाद बढ़ने के साथ यह पैरोडी गीत वायरल हो रहा है।
सोशल मीडिया में ऐसे वीडियो देखने को मिल रहे हैं, जिनमें लोग हम होंगे कंगाल गीत को गाते नजर आ रहे हैं। बहुत से लोग ये समझते हैं कि हम होंगे कामयाब किसी हिंदी फिल्म का गीत है, मगर ऐसा नहीं है। हम होंगे कामयाब एक तरह का लोक गीत है, जिसकी जड़ें अमेरिकी नागरिक आंदोलन से जुड़ी हैं। इस लेख में हम आपको इस गीत का पूरा इतिहास बता रहे हैं।
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कब और कैसे बना ‘हम होंगे कामयाब गीत’?
‘हम होंगे कामयाब’ असल में अमेरिकी गीत We Shall Overcome का हिंदी तर्जुमा है, जिसके बोल स्थानीय मुद्दों और चेतना के हिसाब से बदले गये हैं। हालांकि, गीत की मूल भावना और लय वही रखी गई है।
वी शैल ओवरकम सम की उत्पत्ति की सही-सही जानकारी तो उपलब्ध नहीं है, मगर यह एक गॉस्पेल संगीत का हिस्सा रहा है। गॉस्पेल संगीत ईसाई धर्म का संगीत है, जो ईश्वर की आराधाना या सामाजिक समारोह में बजाया जाता है।
माना जाता है वी शैल ओवरकम, आइ शैल ओवरकम सम डे का रूपांतरण बताया जाता है, जिसकी रचना अमेरिकन मैथोडिस्ट मिनिस्टर चार्ल्स अल्बर्ट टिंडली ने की थी।
इसका आधुनिक वर्जन पहली बार 1945-46 में चार्ल्स्टन सिगार फैक्ट्री में हड़ताल के दौरान तम्बाकू मजदूरों ने गाया था। 1947 में वी शैल ओवरकम पीपुल्स सॉन्ग्स बुलेटिन में छपा था।
मगर, गीत सबसे ज्यादा चर्चा में तब आया, जब यह 1960 के दशक में अमेरिका में हुए नागरिक अधिकार आंदोलन का प्रमुख गीत बन गया, जिसे मार्टिन लूथर किंग जूनियर जैसे नेताओं ने समर्थन दिया। यह गीत दुनिया भर में फैल गया और विभिन्न भाषाओं में अनुवादित हुआ।
अमेरिकी लोक गायक और संगीतकार पीच सीगर ने इस गीत को लोकप्रिय करने में अग्रणी भूमिका निभाई थी। फिलहाल, यह गीत कॉपीराइट के दायरे में नहीं आता।
भारत में आगमन और हिंदी अनुवाद
भारत में “We Shall Overcome” को हिंदी में “हम होंगे कामयाब” के रूप में रूपांतरित किया गया। इस गीत के हिंदी संस्करण का श्रेय गीतकार गिरिजा कुमार माथुर को जाता है, जिन्होंने इसे भारतीय संदर्भ में ढाला, मगर मूल भाव को बनाये रखा। माथुर एक प्रसिद्ध हिंदी कवि और लेखक थे।
हिंदी संस्करण में यह गीत ना केवल एक प्रदर्शन गीत के रूप में, बल्कि बच्चों और युवाओं के बीच प्रेरणा का स्रोत बन गया। “हम होंगे कामयाब” के बोल सरल और असरदार हैं, जो एकता, विश्वास और भविष्य में सफलता की आशा को व्यक्त करते हैं।
भारत में लोकप्रियता
भारत में यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के बाद के दौर में विशेष रूप से लोकप्रिय हुआ। इसे स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक समारोहों में गाया जाने लगा। 1970 और 1980 के दशक में यह बच्चों के बीच एक प्रेरणादायक गीत के रूप में बहुत प्रसिद्ध हुआ।

इसे अक्सर राष्ट्रीय पर्वों जैसे स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर गाया जाता था। गीत का संदेश- एक दिन हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त करेंगे- भारतीय समाज में आशावाद और संघर्ष की भावना को प्रतिबिंबित करता है। यह गीत एनसीईआरटी की टेक्स्ट बुक में भी शामिल है, जिसका स्क्रीनशॉट नीचे दिया गया है।
इस गीत को बॉलीवुड में भी इस्तेमाल किया गया। मिसाल के तौर पर, 1983 की फिल्म ‘जाने भी दो यारो’ में इसका एक संस्करण शामिल है, जिसे वनराज भाटिया ने संगीतबद्ध किया और महेंद्र कपूर ने गाया। यह फिल्म एक व्यंग्यात्मक कॉमेडी थी और गीत का प्रयोग उसमें एक अलग संदर्भ में किया गया, जो इसकी बहुमुखी लोकप्रियता को दर्शाता है।
शाह रुख खान की 2010 में आई फिल्म माइ नेम इज खान में इस गीत का एक खास सिचुएशन में इस्तेमाल किया गया था। इस फिल्म का निर्माण और निर्देशन करण जौहर ने किया था।
हम होंगे कामयाब के आ चुके हैं कई वर्जन
‘हम होंगे कामयाब’ का संगीत मूल रूप से We Shall Overcome की धुन पर आधारित है, जो एक साधारण और मधुर राग पर बनाई गई है। भारत में इसे विभिन्न संगीतकारों ने अपने तरीके से प्रस्तुत किया। समीर रावल जैसे संगीतकारों ने इसे कई एल्बमों में शामिल किया और सोनल रावल जैसे गायकों ने इसे अपनी आवाज दी।
इसके अलावा, जावेद अली, हर्षदीप कौर, कुणाल गांजावाला, जुबिन गर्ग और उषा उत्थुप जैसे कलाकारों ने भी 2020 में एक संस्करण प्रस्तुत किया, जिसे सुप्रतीक श्यामल घोष ने संगीतबद्ध किया।