मुंबई। Bandit Queen On Prime Video: शेखर कपूर की फिल्म बैंडिट क्वीन भारतीय सिनेमा की कल्ट फिल्मों में गिनी जाती है। दिवंगत दस्यु सुंदरी फूलन देवी की इस बायोपिक को अब ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजन प्राइम पर दिखाया जा रहा है, मगर प्लेटफॉर्म ने जिस तरह ओटीटी के लिए फिल्म को एडिट किया है, उससे शेखर बुरी तरह खफा हो गये हैं।
शेखर ने अपनी नाखुशी एक्स पर की गई पोस्ट के जरिए जाहिर की है। कई फिल्ममेकर्स ने इस मामले में शेखर को सपोर्ट किया है।
क्या है शेखर कपूर की आपत्ति?
शेखर ने अपनी पोस्ट में लिखा- अपनी फिल्म को एडिट करते समय निर्देशक और एडिटर एक पीड़ा से गुजरते हैं। हर एक एडिट, कट के लिए कई रात-दिन विमर्श और एक-दूसरे से लड़ते हुए बीतते हैं। रेणु सलूजा और मुझे बैंडिट क्वीन पर बिताये कई महीने याद हैं। और फिर अचानक कोई शख्स ओटीटी रिलीज के लिए फिल्म को लापरवाहीपूर्वक एडिट कर देता है।
मैं उस व्यक्ति से पूछना चाहता हूं। क्या आपने कभी उस प्यार के बारे में सोचा, जो हमने इस फिल्म को दिया था? क्या आपने फिल्म की लापरवाह चीरफाड़ करते समय नुसरत फतेह अली खान की खूबसूरत रचना या कालाकारों के अभिनय के बारे में सोचा?
आप वहां नहीं थे, जब हमने फिल्म को 50 डिग्री की गर्मी में शूट किया था। आप वहां थे, जब हम रातों को जागकर हर सीन की बारीकियां शूटिंग से पहले डिस्कस करते थे। बिल्कुल नहीं। आखिर, मगर भारतीय फिल्ममेकर हैं… किसे परवाह है?
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क्या क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म ऐसे ही काटेंगे?
फिल्ममेकर सुधीर मिश्रा ने शेखर को सपोर्ट करते हुए लिखा कि कोई भी हमें अब यह बनाने नहीं देगा। इस पर शेखर ने जवाब दिया- मुझे नहीं लगता कि सालों पहले मैंने जिस तरह फिल्म बनाई अब कोई ओटीटी प्लेटफॉर्म बनाने देगा। अमेजन प्राइम पर मौजूद बैंडिट क्वीन मेरी वाली फिल्म नहीं लगती।
किसी ने इसको ऐसे काटा है कि पहचानना मुश्किल है। फिर भी इसमें मुझे डायरेक्टर बताया गया है। किसी ने मुझसे पूछा तक नहीं। क्या हम पश्चिमी निर्देशकों से कमतर हैं? क्या ये लोग क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म भी बिना उनकी इजाजत के काट सकते हैं?
शेखर ने बताया कि निर्माताओं ने उन्हें लिखित में बताया है कि उन्होंने फिल्म को एडिट करने की अनुमति नहीं दी है।
सुप्रीम कोर्ट कर लड़ी लड़ाई
हंसल मेहता ने भी प्राइम वीडियो पर बैंडिट क्वीन की एडिटिंग को दुखद बताया। उन्होंने लिखा की जिस फिल्म को भारत का गर्व होना चाहिए, उसके साथ ऐसा बर्ताव दुखद है।
हंसल को जवाब देते हुए शेखर ने लिखा- इसके लिए हम निर्देशक ही जिम्मेदार हैं। हम लड़ना भूल चुके हैं। हम प्रतिरोध करना भूल चुके हैं। और अगर, हम नहीं लड़ते तो हम आज्ञाकारी माने जाते हैं।
बैंडिट क्वीन के लिए हम सेंसर बोर्ड से लड़े। हम हाई कोर्ट में लड़े और हमने देश की सर्वोच्च संस्था सुप्रीम कोर्ट से फिल्म को रिलीज करने के अधिकार की लड़ाई जीती। यही समय है कि निर्देशक अपने क्रिएटिव राइट्स के लिए लड़ें।
I agree @mehtahansal we as Directors have ourselves to blame. We’ve forgotten to fight back. We have forgotten how to resist .. and if don’t , we are compliant.
— Shekhar Kapur (@shekharkapur) March 19, 2025
For #BanditQueen we fought with the Censor Board .. we fought in the High Court .. and we finally won the right to… https://t.co/JyKTflIUjX
1994 में रिलीज हुई बैंडिट क्वान हिंदी सिनेमा की माइल स्टोन फिल्म मानी जाती है। सीमा बिस्वास ने फूलन देवन का रोल निभाया था, जबकि निर्मल पांडेय विक्रम मल्लाह के किरदार में थे। फिल्म में मनोज बाजपेयी, गजराज राव, सौरभ शुक्ला, रघुबीर यादव और गोविंद नामदेव जैसे बेहतरीन कलाकार अलग-अलग भूमिकाओं में थे।