गांधी तेरे कितने रूप, सिनेमा के पर्दे पर गांधी ‘दर्शन’

मुंबई: 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्य तिथि मनाई जाती है। विडम्बना है, कि अहिंसा को धर्म मानने वाले गांधी को आख़िरी वक़्त में हिंसा को सामना करना पड़ा। गांधी का जीवन और उनके अनुभव दूसरों के लिए एक आचार संहिता की तरह हैं। समाज का शायद ही कोई ऐसा तबका या हिस्सा हो, जिस पर महात्मा गांधी का असर ना हो। हिंदी सिनेमा भी इससे अछूता नहीं है, जो गांधी की शिक्षाओं और जीवन को गाहे-बगाहे रूपहले पर्दे पर प्रस्तुत करता रहता है। सिनेमा के ज़रिए गांधी को जन-जन तक पहुंचाने में उन कलाकारों का भी बड़ा योगदान है, जिन्होंने अपनी अभिनय क्षमता से गांधी के सिनेमाई रूप को जीवंत किया।

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इनमें सबसे अहम नाम है सर बेन किंग्सले का, जिन्होंने 1982 की ब्रिटिश फ़िल्म ‘गांधी’ में महात्मा गांधी का क़िरदार निभाया। रिचर्ड एटनबरो निर्देशित ये फ़िल्म ‘गांधी’ की जीवन यात्रा का पहला सिनेमाई दस्तावेज़ है, जिसमें मोहनदास करमचंद गांधी के महात्मा गांधी बनने तक का सजीव-चित्रण है। दिलचस्प बात ये है, कि गांधी बनने के लिए हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नसीरूद्दीन शाह ने भी दावेदारी की थी, और इसके लिए उन्होंने ऑडिशन भी दिया, लेकिन जब उन्होंने बेन को गांधी के लिबास में देखा, तो उन्हें वो खुद हैरान रह गए। बेन और गांधी में फर्क करना लगभग नामुमकिन था। बेन किंग्सले की आज भी सबसे बड़ी पहचान गांधी ही हैं।
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‘गांधी’ में गांधी बनने से चूके नसीर को ये मौक़ा दिया कमल हासन ने, जिनकी फ़िल्म ‘हे राम’ में नसीर ने महात्मा गांधी को रोल निभाया। ये फ़िल्म गांधी जी की हत्या की साजिश पर ही केंद्रित थी। नसीरुद्दीन ने अपने क़िरदार के साथ पूरा न्याय किया।
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मौजूदा दौर में महात्मा गांधी को एक बार सिनेमा में प्रासंगिक बनाने का श्रेय जाता है ‘लगे रहो मुन्ना भाई’ को। राजकुमार हिरानी निर्देशित इस फ़िल्म में एक गैंगस्टर की सोच और गांधी दर्शन को बड़ी खूबसूरती के पिरोया गया है। संजय दत्त ने गैंगस्टर की भूमिका निभाई, तो गांधी बने दिलीप प्रभावल्कर, जो मराठी थिएटर और सिनेमा का बेहतरीन अभिनेता माने जाते हैं। दिलीप की अदाकारी को इतना पसंद किया गया, कि फ़िल्म के तेलगू संस्करण ‘शंकर दादा ज़िंदाबाद’ में गांधी बनने के लिए उन्हें ही चुना गया।
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रिचर्ड एटनबरो की ‘गांधी’ ने जहां उनकी सामाजिक और राजनैतिक ज़िंदगी को पर्दे पर प्रस्तुत किया, वहीं अनिल कपूर की पहली होम प्रोडक्शन फ़िल्म ‘गांधी माई फ़ादर’ में उनकी व्यक्तिगत ज़िंदगी को प्रमुखता दी गई। फ़िल्म गांधी जी के बड़े बेटे हरिलाल गांधी के नज़रिए से बनाई गई थी। हरिलाल के रोल में अक्षय खन्ना थे, वहीं गांधी बने दर्शन ज़रीवाला। इस क़िरदार के लिए दर्शन ने बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर को नेशनल अवॉर्ड भी जीता।
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केतन मेहता की सरदार वल्लभभाई पटेल पर बनाई गई बायोपिक फ़िल्म ‘सरदार’ में अन्नू कपूर ने महात्मा गांधी के रोल को निभाया था। ये क़िरदार अन्नू के करियर की उत्कृष्ट भूमिकाओं में शुमार है।

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