‘पीकू’ के बहाने: पुरुष प्रधान इंडस्ट्री में नायिका प्रधान फिल्म ज्यादा चले, तो तुलना तो होगी ही!

मुंबई: 8 मई को जब ‘पीकू’ रिलीज़ हुई थी, तो माहौल में इतनी गर्मी नहीं थी। शूजीत सरकार के डायरेक्शन में बने एक अच्छे सिनेमा की उम्मीद भर थी ‘पीकू’। असल में इंडस्ट्री और दर्शकों, दोनों को इंतज़ार था 15 मई का, जिस दिन रिलीज़ होने वाली थी ‘बॉम्बे वेल्वेट’। इस साल की सबसे ज़्यादा उम्मीदों भरी फ़िल्मों में से एक, ‘बॉम्बे वेल्वेट’। मगर उम्मीदें कैसे धराशायी होती हैं, इसकी मिसाल बन गई ‘बॉम्बे वेल्वेट’।
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‘पीकू’ ने जितनी ओपनिंग (5.32 करोड़) ली, वो फ़िल्म की हैसियत के हिसाब ठीक माना गया। लेकिन ओपनिंग वीकेंड के अगले दो दिनों में ‘पीकू’ ने जो किया, उसकी उम्मीद ना तो शूजीत सरकार को थी, और ना खुद दीपिका को। ओपनिंग वीकेंड के कलेक्शंस 25 करोड़ के आंकड़े को पार कर गए। लगभग 20 करोड़ की सीधी जंप। ‘पीकू’ की सक्सेस का ये सिलसिला दूसरे वीकेंड में भी जारी रहा।
इधर ‘पीकू’ प्रोड्यूसर्स के बैंक बैलेंस को मोटा कर रही थी, उधर एक हफ़्ते बाद रिलीज़ हो गई दीपिका पादुकोणे के एक्स- बॉय फ्रेंड रणबीर कपूर की मेगा बजट फ़िल्म ‘बॉम्बे वेल्वेट’। इससे ‘पीकू’ के मेकर्स की थोड़ी चिंता बढ़ी होगी, क्योंकि ये बात वो पहले से मानकर बैठे होंगे, कि रणबीर की फ़िल्म के आने के बाद ‘पीकू’ को पीछे हटना होगा। मगर, कहानी का ट्विस्ट तो देखिए, ‘बॉम्बे वेल्वेट’ को ‘पीकू’ से भी कम ओपनिंग (5.20 करोड़) मिली। ओपनिंग वीकेंड में फ़िल्म महज़ 16.10 करोड़ का बिजनेस कर पाई। कहां 25.22 करोड़ और कहां 16.10 करोड़। जितना बिजनेस ‘बॉम्बे वेल्वेट’ ने अपने ओपनिंग वीकेंड में किया, उससे ज़रा सा ही कम (क़रीब 14 करोड़) ‘पीकू’ ने दूसरे वीकेंड में किया है। इसके साथ बंगाली बाप-बेटी की ये कब्ज़ भरी कहानी दूसरे वीकेंड के बाद 56 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुकी है।
इस फेनोमिनल सक्सेस से शूजीत हैरान हैं। वो कहते हैं- “पीकू ऐसा तूफ़ान बन जाएगा, मुझे नहीं मालूम था। हर घर में बात हो रही है। लोग बार-बार देख रहे हैं। परिवार के साथ जा रहे हैं। ग्रुप में जा रहे हैं। कह रहे हैं अकेले नहीं जाएंगे, मजा़ नहीं आएगा। मैं दर्शकों का शुक्रिया अदा करूंगा।”
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ये बात सही है, कि दोनों फ़िल्मों की तुलना ठीक नहीं है, लेकिन मेल डोमिनेटिड फ़िल्म इंडस्ट्री में जब नायिका प्रधान फ़िल्म बेहतर बिजनेस करती है, तो तुलना अपने आप होने लगती है। ख़ासकर तब, जबकि एक्टर-एक्ट्रेस कभी रिलेशनशिप में रहे हों। दीपिका खुद इस तुलना को सही नहीं मानतीं। वो कहती हैं- “दोनों बिल्कुल अलग फ़िल्में हैं। दोनों के दर्शक अलग हैं। मैं ये मानती हूं, कि आज दोनों फ़िल्मों के लिए पर्याप्त दर्शक मौजूद हैं। ऐसे सधे हुए बयानों के बीच दीपिका पीकू की क़ामयाबी का जश्न मना रही हैं, तो रणबीर आत्मचिंजन कर रहे होंगे, और ये ज़रूरी भी है। आख़िर ख़ान तिकड़ी के बाद मौजूदा पीढ़ी के एक्टर्स में उनसे ही तो सुपरस्टारडम की उम्मीदें सबसे ज़्यादा है।”

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