नेशनल अवॉर्ड के बाद फ़िल्म कम मिलती हैं: डॉ. द्विवेदी

मुंबई: नेशनल अवॉर्ड मिलने के बाद फ़िल्ममेकर को फ़िल्में मिलना कम हो जाती हैं। ये शिकायत है ‘चाणक्य’ को छोटे पर्दे पर लाने वाले फ़िल्ममेकर डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी की, जिनकी फ़िल्म ‘ज़ेड प्लस’ रिलीज़ के लिए तैयार है।
28 नवंबर को रिलीज़ हो रही फ़िल्म की एक प्रोमोशनल इवेंट में डॉ. द्विवेदी ने व्यंगात्मक लहज़े में कहा- “नेशनल अवॉर्ड मिलने के बाद फ़िल्में मिलनी कम हो जाती है। मुझ पर अक्सर ये आरोप लगाया जाता है, कि आप सोचने वाली फ़िल्में बनाते हैं, और लोग कहते हैं, कि मेरी फ़िल्म देखने के लिए दिमाग घर पर छोड़कर आओ। पर मैं हमेशा कहता हूं, और इस फ़िल्म के लिए भी कहता हूं, कि हम आपको हंसाएंगे, और अपना दिमाग भी साथ लेकर आइएगा।”
डॉ. द्विवेदी निर्देशित फ़िल्म ‘पिंजर’ के लिए मनोज बाजपेई को नेशनल अवॉर्ड स्पेशल ज्यूरी दिया गया था। इसके बाद डॉ. द्विवेदी की कोई फ़िल्म नहीं आई। सनी देओल के साथ वो ‘मोहल्ला अस्सी’ की शूटिंग कंपलीट कर चुके हैं, लेकिन वो फ़िल्म रिलीज़ नहीं हो पा रही है।

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2004 की फ़िल्म ‘पिंजर’ के बाद डॉ. द्विवेदी ‘ज़ेड प्लस’ के साथ लौट रहे हैं, जो एक पॉलिटिकल सेटायर है। फ़िल्म में आदिल हुसैन असलम पंक्चरवाला का क़िरदार निभा रहे हैं। कहानी असलम को ‘ज़ेड प्लस’ सुरक्षा दिए जाने के बाद उसकी जिंदगी में होने वाले बदलाव पर आधारित है। मोना सिंह असलम की बीवी हमीदा के रोल में हैं।
फ़िल्म में मुकेश तिवारी, कुलभूषण खरबंदा और राहुल सिंह भी मुख्य भूमिकाओं में हैं, जबकि ऋषिता भट्ट तीन गानों पर डांस कर रही हैं, और सूत्रधार भी हैं।

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