डायरेक्शन में अजय की वापसी, बाक़ी का इंतज़ार

मुंबई: अजय देवगन अपनी सेकंड डायरेक्टोरियल फ़िल्म की तैयारी कर रहे हैं। फ़िल्म का नाम ‘शिवाय’ है, जिसमें वो ख़ुद लीड रोल निभाएंगे। अजय की ये फ़िल्म उनकी डायरेक्टोरियल डेब्यू फ़िल्म ‘यू, मी और हम’ (2008) से बिल्कुल उलट है।

‘यू, मी और हम’ जहां इमोशनल ड्रामा थी, ‘शिवाय’ धुआंधार एक्शन फ़िल्म होगी। इस फ़िल्म की शूटिंग अगले साल शूरू होने की संभावना है। तब तक अजय ‘सिंघम् रिटर्न्स’ और ‘एक्शन जैक्सन’ पूरी कर चुके होंगे। बतौर डायरेक्टर अजय की वापसी की ख़बर ने उन एक्टर्स की याद दिला दी है, जो डायरेक्शन में डेब्यू करने के बाद फिर कैमरे के पीछे कभी नहीं गए।

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1991 की फ़िल्म ‘प्रहार’ से नाना पाटेकर ने डायरेक्शन में हाथ आज़माया। फ़िल्म में नाना ने ख़ुद आर्मी ऑफ़िसर की भूमिका अदा की। लीड रोल में उन्होंने न्यूकमर गौतम जोगलेकर और माधुरी दीक्षित को कास्ट किया। डिंपल कपाड़िया भी एक अहम् क़िरदार में फ़िल्म में नज़र आईं। लेकिन नाना का डायरेक्टोरियल डेब्यू बॉक्स ऑफ़िस पर क़ामयाब नहींं हुआ। ख़ास बात ये है, कि उस वक़्त अपने ग्लैमर के लिए मशहूर माधुरी को नाना ने बेहद सादगी के साथ फ़िल्म में पेश किया था। शायद दर्शकों को यही बात पसंद नहीं आई। इसके बाद नाना डायरेक्शन में नहीं लौटे हैं। दो साल पहले ख़बरें आई थीं, कि ‘अब तक छप्पन’ के सिक्वल के साथ नाना डायरेक्शन में लौटेंगे, पर वो ख़बरें ही रहीं।

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1999 में सनी देओल ने ‘दिल्लगी’ से डायरेक्शन में क़दम रखा। पर्दे पर अपने ढाई किलो के हाथ के लिए मशहूर सनी की डायरेक्टोरियल डेब्यू फ़िल्म बेहद सॉफ़्ट रही। ‘दिल्लगी’ इमोशनल ड्रामा थी, जिसमें उनके साथ बॉबी देओल सेकंड लीड रोल में नज़र आए, जबकि उर्मिला मातोंडकर फीमेल लीड में थी। प्रेम त्रिकोण की ये कहानी दर्शकों को ज़्यादा दिलचस्प नहीं लगी, और सनी को फिर डायरेक्शन करने की हिम्मत नहीं हुई। हालांकि, पिछले काफी वक़्त से ख़बरें ये हैं, कि सनी ‘घायल रिटर्न्स’ के साथ डायरेक्शन में लौटने की तैयारी कर रहे हैं।

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1999 में ही ऋषि कपूर ने भी अपने पापा राज कपूर के पद चिह्नों पर चलने की कोशिश की, और डायरेक्ट की ‘आ अब लौट चलें’। इस एनआरआई ड्रामा में अक्षय खन्ना और ऐश्वर्या राय ने लीड रोल्स निभाए। राजेश खन्ना ने अक्षय के पिता का क़िरदार निभाया, लेकिन फ़िल्म कॉमर्शियली नहीं चली, और ऋषि कपूर को डायरेक्शन के ड्रीम्स को छोड़ना पड़ा।

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2002 में वेटरन एक्टर अनुपम खेर ने ‘ओम जय जगदीश’ के साथ बतौर डायरेक्टर बॉलीवुड में क़दम रखा। इस फैमिली ड्रामा में अनुपम ने अनिल कपूर, अभिषेक बच्चन और फरदीन ख़ान को लीड रोल्स में कास्ट किया। फ़िल्म कॉमर्शियली फ्लॉप रही। इसके बाद अनुपम ने कभी डायरेक्शन को हाथ नहीं लगाया।

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2006 में नसीरूद्दीन शाह ने भी डायरेक्टर बनने की तरफ क़दम बढ़ाया, और डायरेक्ट की ‘यूं होता तो क्या होता’। नसीर का साथ देने के लिए इस फ़िल्म में इरफ़ान ख़ान, कोंकणा सेन शर्मा, परेश रावल, जिमी शेरगिल, बमन ईरानी और ख़ुद नसीर की पत्नी रत्ना पाठक शाह स्टार कास्ट में शामिल थीं। लेकिन ये इमोशनल ड्रामा फ्लॉप रहा, और नसीर भी इसके बाद डायरेक्शन में नहीं लौटे।

2008 में आमिर ख़ान भी बन गए डायरेक्टर, और वो ऐसे चंद एक्टर्स में शुमार हैं, जिनका डायरेक्टोरियल डेब्यू सक्सेसफुल रहा है। आमिर की डेब्यू फ़िल्म ‘तारे ज़मीं पर’ डिस्लेक्सिया के शिकार बच्चे की कहानी थी, जिसमें आमिर ने उसके टीचर का क़िरदार निभाया। फ़िल्म क्रिटिकली और कमर्शियली क़ामयाब रही। पर आमिर उसके बाद भी डायरेक्शन में नहीं लौटे हैं। उम्मीद की जा रही है, कि जल्द दर्शकों को आमिर की डायरेक्टोरियल फ़िल्म देखने को मिलेगी।

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